स्वदेश से इतना प्यार हो
हर हाथ में नंगी तलवार हो
शत्रुओं को हराने हेतु हम तैयार हों
अंदर सुलगती अंगार हो
सारे संसार को जलाने को हम तैयार हों
एक नूतन संसार बनाने को दिल बेकरार हो
बलिदानियों का जगह-जगह सत्कार हो
देश द्रोहियों का दुत्कार हो
वीरता ही हमारा श्रृंगार हो
वीर योद्धाओं का सत्कार हो
साहसी सारे शूर स्वीकार हों
कायर सारे दरनिकार हों
सारे संसार से सबको प्यार हो
बलि के लिए वीर हमारे तैयार हों।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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