जिला हमारा बागी
है यह तपी त्यागी
है यह बड़ भागी
यहां भृगु स्थान है
यहां गंगा का मैदान है
यहां वीर जवान हैं
राजा बलि का स्थान है
हम देते बलिदान हैं
हम हिंद के गौरव गान हैं
गूंजते जहां "सहज" के गान हैं
हम लाते तूफान हैं
हम गाते आजादी के गान हैं
दर्दर मुनि के नाम पर
इस पावन धाम पर
यहां ददरी मेला लगता है
जहां स्वाभिमान जगता है
जहां आसमान झुकता है
जहां का वीर नहीं रुकता है
लिट्टी चोखा खा कर
अंग्रेजों को मजा चखा कर
मंगल सा वीर निकलता है
हजारी सा साहित्यकार निकलता है
एक तलवार से
एक वार से
शत्रु खच खच कटता है
तब जग बागी बलिया कहता है
जवान बलिया का
ललाट बलिया का
चम चम चमकता है
साहस नस नस से टपकता है
तब बागी बलिया दमकता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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