धरा पर है हवा और पानी
इसीलिए है यहां जिंदगानी
और उपग्रह हैं रीते रीते
बिन पानी पवन कैसे हम जीते ?
तो बचाओ हवा और पानी
मत करो मनमानी
मत काटो प्राण की राजधानी को
बचाओ पेड़ पौधे पानी को।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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