आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बलिया के लिट्टी चोखा

                
                                                         
                            बलिया में जा के
                                                                 
                            
बलिया में आ के
बलिया के सत्तू,बलिया के लिट्टी चोखा
खाए नहीं आप तो,खा गए धोखा
है यह चीज अनोखा
कहते इसको बाटी चोखा
गरम गरम
नरम नरम
घी घोस कर
मिलता परोस कर
घर घर
बागी बलिया में
बागी बैरिया में
एक बार आएंगे
फिर बार बार आएंगे
भूल सारे व्यंजन आप जाएंगे
यदि इसे आप एक बार खाएंगे
बार बार आएंगे
आईए मेरे बलिया में
आईए मेरे बैरिया में
वीरों की धरती है
वीर पैदा करती है
मंगल पांडे सा वीर पैदा करती है
यह धीर गंभीर पैदा करती है
यह आजादी की तीर पैदा करती है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर