गंगा मां के किनारे आओ
ददरी मेला देख कर जाओ
बागी बलिया में लगती है भीड़ भारी
बागी बलिया की धरती प्यारी
आते यहां लाखों बिहारी
आते यहां लाखों व्यापारी
ददरी मेला की संस्कृति सबसे न्यारी
हिंदुस्तान का दूसरा सबसे बड़ा मेला
देखो,पशुओं का सबसे बड़ा मेला
लिट्टी चोखा चटनी चाट खाइये
ददरी मेला में आइये
पावन गंगा में नहाइये
जहां भारतेंदु आए
उन्नति की अलख जगाए
जहां बड़े बड़े कलाकार
जहां बड़े बड़े संगीतकार
अपनी कला दिखलाएं
जहां गूंजता संगीत है
जहां नाटक और गीत है
होता एकता का संगम जहां
होता मानव ममता संगम जहां
होता मानव समता का संगम जहां
जिसे जानता जहान है
जहां गूंजते "सहज"के मधुमय गान हैं
उस मेला में आइये
एकता के गीत खाइये।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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