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अपराध से क्यों डर जाना ?

                
                                                         
                            अपराध से क्यों डर जाना ?
                                                                 
                            
देव से भी हो जाता है
हम मानव हम क्या करे
हमारा यही स्वभाव है

पाप हो जिस छन तुमसे
ना भयभीत होना ना घबराना
करना श्रद्धा से प्रणाम प्रभु को
पाप पुण्य का भेद तो जाना

लेकिन! समझ लेना ना अधिकार इसे
जान कर त्याग दो
कब तक सरलता से जीयोगे
पाप पुण्य का भेद जानकर

लक्ष्य की राह सरल हो।असंभव!
हां पूर्वज को पढ़ते जाना
हो पीड़ा तो रो देना
रोते रोते मुस्का भी देना
अपराध से क्यों डर जाना
-अंकज कुमार
 
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3 वर्ष पहले

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