प्रकृति का नजारा
शाम का समय नदी का किनारा
ढलता सूरज आकाश की लालिमा
बहती धार में ढलती किरणों
की छाया
मानो आकाश नदी में समाया
चहुं ओर सुनहरी धारा
प्रकृति का यह खुबसूरत
नज़ारा
सोचो किसने बनाया
यही तो है प्रभु का करिश्मा
स्वरचित
- अंजना सिंह
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