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प्रकृति का नजारा

                
                                                         
                            प्रकृति का नजारा
                                                                 
                            

शाम का समय नदी का किनारा
ढलता सूरज आकाश की लालिमा
बहती धार में ढलती किरणों
की छाया
मानो आकाश नदी में समाया
चहुं ओर सुनहरी धारा
प्रकृति का यह खुबसूरत
नज़ारा
सोचो किसने बनाया
यही तो है प्रभु का करिश्मा
स्वरचित
- अंजना सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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