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प्रकाश

                
                                                         
                            आज फिर प्रकाश की किरणें बिखर गई
                                                                 
                            
मैं जो बिखरी बिखरी सी थी निखर गई
किरणों का प्रकाश जो फैला पूरा आकाश
प्रकाशित है धरती का कोना कोना
अंधेरा छंट कर हुआ बौना
सबमें उजाला फैला गया
घोर अंधेरा छंट गया
रहे प्रकाशित हर दम जन जन और तन मन
सुंदर रहे सबका जीवन
कर रहा कौन यह प्रकशित
वही तो है जो हृदय में है प्रतिष्ठित
और दिखता है नहीं कहीं
बस होता है भाषित
जो सबमें है समाया हुआ
हर वक्त प्रकाश फैला रहा
है उस उजाले को कोटि कोटि नमन
संवर रहे जिससे
पोर पोर और संपूर्ण जीवन।
मेरी कलम से
-अंजना सिंह
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3 महीने पहले

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