शीश को झुकाए जो भी,वीर को जगाए सोए
रग- रग में शौर्य की पुकार करें भारती।
हाथों में तिरंगा थाम ,होठों पर अमर नाम,
दुश्मन के काल का शिकार करें भारती।
देख-देख रूप विकराल ,थर थर कांपे काल,
सिंह के दहाड़ से प्रहार करे भारती।
शीश का चढ़ा के दान ,रक्षक बने जो जवान,
आरती उतार बार बार करें भारती।
मातृभूमि की जो शान, देश पे मिटे जो प्राण,
बलिदानी वीरों का श्रृंगार करे भारती।
सीमा पे खड़ा जो वीर,डगमग हो न धीर,
जीत का उसी के गले हार करें भारती।
गूँजे जब वन्दे मातरम,थमे जो भी अत्याचार
दुश्मनों की छाती पे प्रहार करे भारती।
देश के सपूत जाग ,मन से दे तू विराग ,
तुझसे ही विजय का विचार करें भारती।
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