आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शांति का दीप जलाने दो

                
                                                         
                            चमन में दीप शांति का ,एक बार फिर जलाने दो।
                                                                 
                            
किसी लालच की खातिर अपनी, इमान मत भुलाने दो।
जो फूट डाले हैं किसी ने ,उसको मत अपनाने दो।
मुखौटे के अंदर हैं जो,उनको मत हड़पने दो।
शिक्षा के प्रस्ताव को ,शांति से कहलाने दो
चमन में दीप शांति का ,एक बार फिर जलाने दो।
शिक्षा में राजनीति को, अंदर मत आने दो,
बापू के पावन धर्मों को, फिर से उठ जगाने दो
अहिंसा के पुजारी के ,पदचिन्हों पर चलने दो,
इसके आड़ में खड़े हैं जो ,देशद्रोही उनको मत भड़काने दो,
चमन में दीप शांति एक बार फिर जलाने दो।
भारत माँ के शीश पर , चमकता मुकुट
सजाने दो,
हिंदुस्तान जिंदाबाद का ,एक बार फिर नारा लगाने दो
हर मुद्दे को सूझ बूझ से, आमने सामने आने दो
राजनीति के चक्कर में,अपना धर्म मत गंवाने दो।
शिक्षा पर राजनीति का ,मन मत बनाने दो
चमन में दीप शांति एक बार फिर जलाने दो।
भारती को इक बार, फिर से आने दो,
शांति का चमन फिर से खिलाने दो।
राजनीति इक हद तक सही है पर,
हद से ज्यादा तो,'अमर'भी सही नहीं।
गुमनाम राहों में खुद को ,मत भुलाने दो,
अपने हक को शांति, शांति से बताने दो।

शांति का चमन है, शांति का अमन,
शांति में ही शांति का सारा गमन।
शांति को अशांति , से दूर ही रहने दो,
अपने हक को शांति से ,शांति में ही चलने दो।
मुखौटे की आड़ में ,राष्ट्र को मत भड़काने दो,
चमन में दीप शांति एक बार फिर जलाने दो......

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर