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कोरोनाः कुछ छूट गए, कुछ टूट गए

                
                                                         
                            फ़र्क नहीं है कोई पहले और आज में,
                                                                 
                            
दर्द वही हैं... पहले और आज के...

ग़म बहुत था इस दिल में,
कुछ पहले छूट गए... कुछ को क्रोना ले गया बाँध के...

रिश्तेदारों से रिश्ते थे... जो प्यार में,
बहुत से रिश्ते बदले पहले... बाक़ी रिश्ते क्रोना ले गया तोड़ के...

भगवान से प्रार्थना होती थी... जो भाव में,
डर कर हाथ उठते हैं और टुकड़े हो गए नाजुक दिल के...

'मैं' ही सब कुछ हूँ, ऐसा भाव बसा था मन में,
आत्मा का संबंध बस गया दिल में, इसके और उसके...
-अनीता 'निधि'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

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