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उसका हर ईंट का टुकड़ा कहता है!

                
                                                         
                            दो बेटों को जनम दिया खुद में वो इतराई,
                                                                 
                            
नहीं बिदा करना है बेटी सोचकर वो मुस्काई!
जोड़ा तिनका-तिनका बड़ा सा उसने घोंसला बनाया,
बहू,बेटा पोता,पोती सब रहेंगें इसका
विशेष ख्याल रखवाया!
बेटों के बचपन से उनकी शादी का ख्याल था,
बहू कोई आयेगी घर पर इस बात का इंतजार था!
पढ़ लिख कर बेटों ने जब अपनी शाख जमाई,
मोटा दहेज लेकर के दोनों बहुओं को घर लाई!
आते ही बहुओं के उसने घर का काम सारा छोड़ दिया,
"मुझसे अब कुछ नहीं होता "
ये कह बहुओं का बेटों के संग जाना न मंजूर किया!
कुछ दिन तो कोशिस की बहुओं ने कि ये
घोंसला ना टूटे,
साथ सभी का बना रहे किसी का सपना पीछे ना छूटे!
पर दो बेटों और पैसों के घमंड मे मन इतना मगरूर था,
मैं तो हूँ इस घर की रानी इस बात का बड़ा गुरुर था!
इसी गुरुर के चलते सबने धीरे-धीरे उस घोंसलें को छोड़ दिया,
अपना पैसा अपने पास रखो ये कह कर
उससे बेटे बहुओं ने नाता तोड़ लिया!
आजकल वो घोंसला अब बिल्कुल खाली रहता है,
पैसो और बेटों का घमंड कभी ना करना
उसका हर ईंट का टुकड़ा कहता है!
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9 घंटे पहले

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