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तिरंगे में सजी मेरी भारत-माँ

                
                                                         
                            केसरिया आँचल ओढ़े,
                                                                 
                            
हरित धरा-सी साड़ी है,
श्वेत रंग में शांति सजी,
भारत की छवि न्यारी है।

माथे की बिंदी बनकर जैसे,
सूरज का उजियारा है,
आँखों में सपनों का भारत,
हृदय में देश हमारा है।

केसरिया कहता—त्याग करो,
साहस से बढ़ते जाना है,
श्वेत कहे—सत्य-पथ पर चल,
प्रेम-दीप हर मन में जलाना है।

हरित रंग खुशहाली का,
धरती की मुस्कान है,
तीनों रंगों में बसता,
भारत का सम्मान है।

जिन वीरों ने प्राण दिए,
उनको शत-शत नमन हमारा,
उनके बलिदानों से ही तो,
मुक्त हुआ देश हमारा।

आओ आज तिरंगा लेकर,
एक नया संकल्प करें,
जाति-धर्म की दीवारें तोड़ें,
भारत को और समर्थ करें।

स्वतंत्र गगन में लहराए,
भारत का अभिमान तिरंगा,
जन-जन के मन में गूँज उठे—
जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद!
- अनिता चतुर्वेदी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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