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राधा-श्याम का प्रेम

                
                                                         
                            राधा-श्याम का प्रेम
                                                                 
                            

मंद-मंद मुस्कान अधरों पर,
नयनों में अनुराग,
राधा के संग श्याम खड़े हैं,
जैसे मिल गया सुहाग।

फूलों की कोमल पंखुड़ियों पर
प्रेम लिखा है आज,
मुरली की अनसुनी तान में
गूँज रहा अनुराग।

राधा जैसे साँझ सलोनी,
श्याम प्रभाती राग,
एक-दूसरे में खोकर दोनों
भूल गए संसार।

नहीं अपेक्षा, नहीं शिकायत,
नहीं मिलन की प्यास,
प्रेम जहाँ निष्काम हो जाए,
वहीं कृष्ण का वास।

राधा की पलकों की छाया,
श्याम का मधुर प्रकाश,
दो तन होकर एक धड़कन—
यही प्रेम का विश्वास।

फूल झरें या ऋतु बदल जाए,
बदले जग की चाल,
राधा-श्याम का प्रेम रहेगा
युग-युग अमिट मिसाल।

राधे-राधे नाम जपें तो
मन हो निर्मल-धाम,
प्रेम जहाँ राधा बन जाए,
हर हृदय में बसें श्याम।
- अनिता चतुर्वेदी
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2 महीने पहले

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