मित्रता का मान
मित्र वही, जो राह कठिन हो,
फिर भी साथ निभाता है,
अपने हिस्से का सुख देकर,
आँसू स्वयं छिपाता है।
जिसके स्वर में स्नेह झरे हो,
जिसकी आँखों में विश्वास भरा,
जिसके संग हर पीड़ा हल्की,
हर दिन लगे मधुमास।
जब जीवन की आँधी आए,
डगमग हों सब नावें,
मित्र खड़ा हो दीपक बनकर,
राह नई दिखलावे।
नहीं चाहता यश या वैभव,
नहीं मान की चाह,
उसका धन है निर्मल हृदय,
सेवा ही जिसकी राह।
रूठे मन को हँसा सके जो,
वही सच्चा उपहार,
मित्र नहीं केवल संबंध,
जीवन का आधार।
आओ आज प्रतिज्ञा करें,
मन में रहे उजियारा,
सत्य, स्नेह, साहस से महके,
अपना घर-द्वारा।
मित्रता का यह पावन बंधन,
रहे सदा अविराम,
जीवन-पथ का श्रेष्ठ संबल,
सच्चा उसका नाम।
सुख-दुःख, हँसी, संघर्ष सभी में,
जो न बदले व्यवहार,
ऐसी निर्मल मित्रता को,
शत-शत मेरा नमस्कार।
- अनिता चतुर्वेदी
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