माटी से आज गढ़े गए हैं,
घर-आँगन के भाग्य विधाता,
दूर्वा-दल और लाल सिंदूर से
सजे गणपति मंगलदाता।
चौखट पर रंगोली सजी है,
दीप जले हर द्वार,
मोदक की मीठी खुशबू लेकर
आया उत्सव अपार।
बच्चों के चेहरे पर उत्साह,
आँखों में भोला विश्वास,
“गणपति बप्पा मोरया” गूँजे,
मन में जागे उल्लास।
कहीं ढोल की थाप सुनाई दे,
कहीं बजे मृदंग,
भक्ति में झूमे गली-मोहल्ले,
हर धड़कन हो संग।
लाल चुनरिया, फूलों की माला,
माथे चंदन का तिलक,
छोटे-से इस देवालय में
बसता जैसे पूरा जग।
माँ की थाली में दीप सजे हैं,
बाबा लाएँ दूर्वा,
बहन सजाए फूलों से आसन,
भाई चढ़ाए लड्डू।
सुख हो, शांति हो हर घर में,
मिट जाए मन का भार,
विघ्न-विनाशक, बुद्धि-विधाता,
कर दो जीवन पार।
जिस राह में काँटे हों बिखरे,
उसमें फूल खिला देना,
थके हुए मन को हे बप्पा,
थोड़ा-सा बल दे देना।
जिस घर में रूठे रिश्ते हों,
वहाँ प्रेम जगा देना,
जिस आँख में आँसू ठहरे हों,
उसको हँसना सिखा देना।
धन से पहले सद्बुद्धि देना,
यश से पहले मान,
मन में दया, वाणी में मधुरता,
कर्मों में कल्याण।
तेरे चरणों में शीश झुकाकर
इतना ही वर माँगें—
हमसे कोई दुखी न हो,
और न कोई हमसे रूठे।
गणपति बप्पा जब घर आएँ,
मंगल साथ में लाएँ,
जाते-जाते भी आँगन में
अपनी कृपा छोड़ जाएँ।
गणपति बप्पा मोरया,
मंगलमूर्ति मोरया!
हर घर में सुख, हर मन में शांति,
जय गणनायक मोरया!
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