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बारिश में खिलती ज़िंदगी

                
                                                         
                            बारिश में खिलती ज़िंदगी~
                                                                 
                            

भीगी-भीगी राहों पर,
आज कोई मुस्काया है,
बादल की ठंडी छाँव तले
मन ने गीत सुनाया है।

पग-पग जल की लहरें हैं,
फूलों पर मोती झरते हैं,
हवा की मस्त अंगड़ाई में
सपने जैसे निखरते हैं।

खुली बाँह जब उसने कीं,
जैसे बारिश को थाम लिया,
हर बूँद ने आकर उसके
मन का कोई नाम लिया।

न कोई शिकवा, न कोई डर,
न बीते कल की परछाई,
बस इस पल को जी लेने की
मन में जागी नई तरुणाई।

भीगी चुनरी, भीगे नयन,
चेहरे पर उजली मुस्कान,
प्रकृति की गोद में मिलकर
खो गया जैसे सारा जहान।

यह तस्वीर नहीं—एक एहसास है,
जीवन का सुंदर विश्वास है,
जब मन खुलकर बारिश में भीगे,
हर मौसम फिर मधुमास है।
— अनिता चतुर्वेदी ‘मनस्वरा’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

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