बाल कविता ~सावन की बहार
काले बादल छाए अम्बर में,
बिजली चमके बार-बार।
बूंदें गिरें धरती पर,
जैसे मोती की फुहार।
हरी-भरी है धरती सारी,
नदी बहे कल-कल कर।
मेंढक टर्राए ताल में,
फूल महके घर-घर।
मोर नाचे पंख पसारे,
देख सावन का त्योहार।
डाली पर चिड़िया गाए,
मीठा-मीठा झंकार।
गाँव की गलियों में झूले,
रंगीन साड़ियों की कतार।
हँस-हँस गीत गातीं नारियाँ,
सावन का है त्योहार।
किसान खड़ा फावड़ा ले,
आँखों में खुशी अपार।
बोले "बरसे मेघ राजा,
हो जाए खेत तैयार"।
प्रकृति का ये रूप सुहाना,
मन को दे आराम।
सावन तू बरसता रह,
धरती का हो जाए कल्याण।
-अनिता चतुर्वेदी
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