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बाल कविता~बरसात आई

                
                                                         
                            बरसात आई
                                                                 
                            

काले-काले बादल आए,
संग में अपने पानी लाए।

टप-टप बूँदें गिरती जाएँ,
सूखी धरती हँसती जाए।

कागज़ की हम नाव चलाएँ,
छप-छप पानी में मुस्काएँ।

मेंढक बोले, "टर्र-टर्र-टर्र",
मोर नाचे, फैले पर।

पेड़-पौधे झूमें गाएँ,
नई हरियाली घर ले आएँ।

इंद्रधनुष जब नभ में छाए,
सात रंग सबको लुभाएँ।

बरखा रानी, धन्यवाद!
तुमसे खिलता सारा गाँव।

आओ मिलकर यही कहें—
पानी कभी न व्यर्थ बहें।
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3 महीने पहले

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