बरसात आई
काले-काले बादल आए,
संग में अपने पानी लाए।
टप-टप बूँदें गिरती जाएँ,
सूखी धरती हँसती जाए।
कागज़ की हम नाव चलाएँ,
छप-छप पानी में मुस्काएँ।
मेंढक बोले, "टर्र-टर्र-टर्र",
मोर नाचे, फैले पर।
पेड़-पौधे झूमें गाएँ,
नई हरियाली घर ले आएँ।
इंद्रधनुष जब नभ में छाए,
सात रंग सबको लुभाएँ।
बरखा रानी, धन्यवाद!
तुमसे खिलता सारा गाँव।
आओ मिलकर यही कहें—
पानी कभी न व्यर्थ बहें।
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