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तुलना की कैद

                
                                                         
                            कब तक करोगे तुलना,
                                                                 
                            
अपने अस्तित्व की?
खाना, पीना, कपड़ा,
बच्चा, और फिर उसके बच्चे...
कब तक इस भ्रामक दौड़ में,
भागोगे? कब तक?

तुलना का मोह छोड़कर,
अपनी गलतियों से सीख लो।
दुनिया को दिखाने की बजाय,
खुद के भीतर की कमी से सीख लो।
क्या आज कुछ बेहतर कर सकते हो?
बस यह तय करो।

वरना आज़ाद होकर भी तुम,
ताउम्र एक कैदी की ज़िंदगी जीओगे।
एक ऐसी मानसिक कैद में,
जो तुम्हें कभी खुश होने नहीं देगी।
अब इस भ्रम से बाहर आओ,
खुद को अपनाओ।
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एक घंटा पहले

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