बहुत दिनों से तुझसे शिकायत नहीं ज़िंदगी,
बड़े शान से तू गुजर रही है ।
हंसते हंसते कट रहे हैं रस्ते,
बिना मोड़ के तू बढ़े जा रही है ।
ना खौफ़ किसी का न डर किसी का,
निडर हो कर तू चले जा रही है ।
ना काँटे राह में ना ठोकर कोई,
तू आसान रस्ते पे बढ़ीं जा रही है ।
मुड़ कर कोई क्यूं देखे
जब दर्द के साये से तू दूर जा रही है ।
-अनिला विर्णवे
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