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मॉनसून सा मौसम

                
                                                         
                            मॉनसून सा मौसम ऐसा कमाल कर जाती हो,
                                                                 
                            
कभी मिल आउटेज, कहीं फीडर चोक कराती हो।

फिर भी मैं तुम्हें ऑयल गन के साथ चलता हूँ,
मुझे अपने नहीं, मेंटेनेंस की किस्मत से बचाता हूँ।

फिर भी तुम मुझसे नाराज़ हो जाती हो,
CHP से गीला कोयला भेजती हो।

फिर तुम्हें अपनी मोहब्बत से तुम्हें सींचता हूँ,
फिर प्यार से अपने होने का एहसास दिलाता हूँ।

फिर मेरे प्यार में इतना गिर जाती हो
कि मिल के सहारे अपनी दुनिया,
बॉयलर से जगमगाती हो।

और मोहब्बत के अर्हाज़ से तुम्हें सींचता हूँ,
और प्यार की फुहार से,
फायर हाइड्रेंट की पुकार से तुम्हें जगाता हूँ।

तुम नटखट हो, सीधे मिल से मिलकर
बॉयलर को रोशन कर जाती हो।

मुझे खुद को नहीं,
मुझ पर एहसान कर जाती हो।

इतनी मोहब्बत न करो मुझसे जी,
कि तुम मिल के गलियारों में जाकर
बॉयलर को जगमगाती हो।

अपने वादे से तुम नहीं मुकरती हो,
अपना जादू दिखाकर
बॉयलर को रोशनी दे जाती हो।

मौसम इतना जुदा कर जाती हो
और प्लांट का PLF बढ़ा जाती हो।

यही मॉनसून के मौसम का जादू दिखा जाती हो।
— अनिल शाह
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18 घंटे पहले

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