जब बारिश की रिमझिम बूँदें पड़ती हैं,
तो मन कुछ मचल-सा जाता है।
जैसे भीगी मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू,
और दारू के साथ चखना याद आ जाता है।
-अनिल शाह
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