ये बारिश का मौसम भी अजीब होता है,
आँखों के आँसुओं को
अपना नाम दे जाता है।
कभी हम उनसे मिलने भी निकलते हैं,
तो वक्त-बेवक्त
अपने होने का एहसास करा जाता है।
ये बारिश का मौसम भी अजीब होता है।
कभी तेज़ आँधी-तूफ़ान
हमें डरा जाते हैं,
तो कभी धीमी-धीमी बारिश
उनकी याद जगा जाती है।
ये बारिश का मौसम भी अजीब होता है।
पर मैंने आज ठान लिया है,
चाहे कुछ भी हो जाए,
तुमसे आज मिलना है,
दिल की हर बात
रूह तक पहुँचा देनी है।
ये बारिश गवाह रहेगी
मेरे इस इंतज़ार की,
कि मोहब्बत अगर सच्ची हो,
तो हर मौसम
मिलन का पैगाम बन जाता है।
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