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मेरी खामोशियों से जो मेरे हुए

                
                                                         
                            कुछ उजाले मेरे पास आने लगे
                                                                 
                            
मेरी बदहाली सबको दिखाने लगे
सिर्फ मै ही सबब हूं तेरे हाल का
हाल ए दिल तुम मुझी से छिपाने लगे
कुछ पुराने फफोले बुझे भी नहीं
आग फिर तुम नई क्यों लगाने लगे
याद क्या आ गया,तुमको रोते हुए
आँसुओं में भी तुम मुस्कराने लगे
रूठकर रात को जो चला जाता है
सुबह पाता हूं उसको सिरहाने लगे
जब गए दोस्त सब,साथ छोड़ा नहीं
और मुझको ही तुम आजमाने लगे
रंग जीवन में जिनके है नाचीज़ से
रंग मुझको ही अपना दिखाने लगे
मेरी खामोशियों से जो मेरे हुए
मेरे लफ्जों से अब दूर जाने लगे
परवाने बेजार थे,जब शमां थी बुझी
जल उठी तो ये कितने दीवाने लगे
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2 घंटे पहले

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