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कोई सिक्का उछालना था हमें

                
                                                         
                            बहकता मन सम्हालना था हमें
                                                                 
                            
गलतफहमी निकालना था हमें
देर तक कशमकश की हालत थी
कोई सिक्का उछालना था हमें
कुछ न हासिल हुआ बेसब्री से
खुद को कुछ और टालना था हमें
जिंदगी ताउम्र कुछ पकाती रही।
सब्र कुछ और डालना था हमें
ये मुगालतें थीं तुम मुकम्मल हो
तुम अधूरे थे मानना था हमें
कौन गिरते को थाम लेता है
खुद को पहले सम्हालना था हमें
ये थी ख्वाहिश कि शेर से खेलें
शेर बचपन से पालना था हमें
ये समझकर कि दुनिया है फानी
जाने क्या और जानना था हमें
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एक घंटा पहले

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