रह न जाए कहीं मलाल कोई
उसका कांटा न दे निकाल कोई
सच कहेंगे ये कसम खा ली है
पूछ बैठे न कहीं हाल कोई
आज नासाज सी तबियत है
आज हमसे नहीं सवाल कोई
लाल है गाल,शर्म आई उसे
या लगा गया है गुलाल कोई
जी करे तो इधर निगाह करो
नहीं है मुझसा खस्ताहाल कोई
है परेशानी भी कहना मुश्किल
देने लगते हैं सब मिसाल कोई
पुल हमारे दरम्यां का गिराकर
वक्त खड़ा कर गया दीवाल कोई
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