प्यास ऐसी है कि हर दरिया को हैरानी है
सब्र ऐसा कि कयामत की इक कहानी है
हम तो बेफिक्र बहुत,हम तो बेताब बहुत
बदलता मौसम है, या रुकती हुई रवानी है
कब आग बरसा दे,बरसा दे कब पानी जाने
आसमान की तो हरेक, बात आसमानी है
ढूंढने लगा अब इन्सान ग़मों में खुशियां
क्या सजा दें इसे कुदरत की पशेमानी है
दूर से देखते हैं हम,खेल सभी दुनिया के
चाल क्या,पैंतरे क्या वजीर,राजा रानी है
इतना जल्वा तेरा,हम तेरे अभी हो न सके
और इस बात पर दुनिया मेरी दीवानी है
लौट आयेंगे हम जब पांवों में थकन होगी
हर तरह से अभी दुनिया भी आजमानी है
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