इतना पीकर भी होश है शायद
कोई बड़ा अफसोस है शायद
गिरता हूं फिर ,खड़ा हो जाता हूं
मुझमें बाकी भी जोश है शायद
तू भी कुछ परेशान दिखता है
मुझसा तू भी बेलौस है शायद
अब तो मैं भी यकीन नहीं करता
दिल ये वादा फरोश है शायद
सब चले जाते हैं किनारा कर
इसमें मेरा ही दोष है शायद
फुर्कतों से लिपट के सोता हूं
हासिल कोई आगोश है शायद
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