जिंदगी से कोई गिला भी नहीं
और खुशियों का सिलसिला भी नहीं
रुका नहीं मैं सफर आज तलक जारी है
दूर हमराह, दूर दूर काफिला भी नहीं
संवारता था कोई बिगड़ी सी तकदीर मेरी
उसका अंदाजा है मुझको मगर दिखा भी नहीं
नहीं नामों निशान चमन में खिजाओं का
नहीं ख़ुश्बू , कोई फूल तक खिला भी नहीं
ढला दिन रात भी बीती नई सुबह भी हुई
किसी लम्हे पर हूं अटका हुआ, गिरा भी नहीं
हवाएं तेज थीं कितनी हसीन हसरत की
हमसे हालात का पत्थर बहुत हिला भी नहीं
वो मगरूर जानता है हमें भीऔरों की तरह
मगर बाकायदा मुझसे कभी मिला भी नहीं
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