कुछ जंग गंवा देने की दहशत तो नहीं है
हथियार डालने की जरूरत तो नहीं है
हम अपनी जमीनें उन्हें हरगिज़ नहीं देंगे
फिर जीतने की उनकी यूं कुव्वत तो नहीं है
किसी फतह के बाद भी आराम मत करो
गुजरे हुए दिनों की नसीहत तो नहीं है
हारे हुए दुश्मन से कैसा हाथ मिलना
नजरें मिलाएं उनमें ये गैरत तो नहीं है
हर जख्म से रिसता लहू मिट्टी भी कर दे लाल
इस कर्ज अदायगी में किफायत तो नहीं है
दिल हारकर, दिल जीतने धुन है अब हमें
अफसाना ये सुना है, हकीकत तो नहीं है
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