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जुल्म होते, तो सामना करते

                
                                                         
                            जुल्म होते, तो सामना करते
                                                                 
                            
गफलतें थीं अपनी क्या करते
हम भी राजी थे बहक जाने को
उसको किस मुँह से भी मना करते
जिसे मनाने की हिमाकत भी न थी
क्या मजाल थी उसे खफा करते
ख्वाब में भी जो गुलबदन मिल जाता
क्या बताएं हम क्या क्या करते
लोग कहते हैं हम अच्छे नहीं हैं
जो भी कर देते हैं बुरा करते
वक़्त सब कह देने का है अब
उम्र बीती है तजुर्बा करते
निकले तुम भी तो औरों की तरह
करते सब हो नहीं वफ़ा करते
हमें मालूम है आखिरी मंजिल
डरते हैं पर ,नहीं डरा करते
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2 महीने पहले

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