जीना भी आसान नहीं था,
सही गलत का भान नहीं था
कितनी चीजें फाजिल सी थीं
खोने में नुकसान नहीं था
ऐसे काम हुए हमसे जो
कुदरत का फरमान नहीं था
तुम भी पड़ जाओ उलझन में
अपना ये अरमान नहीं था
दिल से क्यों रुखसत करते हो
मैं कोई मेहमान नहीं था
ठेस लगा करती थी दिल को
जिन्दा था,बेजान नहीं था
बेहतर करना था दुनिया को
फ़र्ज़ था यह एहसान नहीं था
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