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मैं हूं कांटा, है वो गुलाब मेरा

                
                                                         
                            आ रहा आज फिर खयाल तेरा
                                                                 
                            
हो रहा जीना फिर मुहाल मेरा
फिर कोई याद बेतरह आई
गीला होता रहा रुमाल मेरा
वो तो बिंदास और ज्यादा है
उसको मालूम नहीं अहवाल मेरा
हादसे कम नहीं ज्यादा हुए
हुआ बच जाना बाल बाल मेरा
मैंने फिर आसमान को देखा
कोई सुनता नहीं सवाल मेरा
उससे मिलना कहां मुनासिब है
मैं हूं कांटा, है वो गुलाब मेरा
कौन है जिसको रास आता नहीं
होना बेफिक्र, या खुशहाल मेरा
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2 घंटे पहले

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