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फिक्र करते हैं बस वालिद तुम्हारे

                
                                                         
                            क्यों मुझसे इस तरह ऐंठे हुए हो
                                                                 
                            
क्यों झूठा रोब लपेटे हुए हो
इश्क के आसमां के हो सितारे
वफ़ा की राह में लेटे हुए हो
इस झूठी शान को, दामन में अपने
हजारों बद्दुआएं, हाय समेटे हुए हो
दिखाते हो हमें जो आंखें, घुड़की
किसी की गोद में बैठे हुए हो
फिक्र करते हैं बस वालिद तुम्हारे
तुम ऐसे नासमझ बेटे हुए हो
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2 घंटे पहले

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