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पर सुना है डूब गईं ,यहां सभी कश्तियाँ

                
                                                         
                            हौसले नए नए, और नई नई दुश्वारियां
                                                                 
                            
पेश करती जिंदगी है रोज कुछ पहेलियां
उन गुलों की ताजगी, का महज ख्याल है
इर्द गिर्द ठहरी हुई हैं बहुत उबासियां
छोड़ना आवारगी इतना भी आसां नहीं
रास नहीं आ रही दिल को ये सख्तियां
खुद से रब्त यूं भी कि, दूर सबसे हो गए
कुछ उदास हो गईं हैं प्यार की ये बस्तियां
कुछ ख़लिश में है दिल और कुछ ख्याल हैं
आते जाते दृश्य हैं बनती,मिटती हस्तियां
आसमान से प्यार, और धरती भी अजीज
आती गईं दिल में अपने बेफिजूल तल्खियां
इस लहर का लुत्फ लूं ,जो भंवर के पास है
पर सुना है डूब गईं ,यहां सभी कश्तियाँ
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4 घंटे पहले

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