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मगर वो लोग थे कैसे कभी जो हमसे मिले

                
                                                         
                            गुनाह हमने किया है सजा हमें ही मिले
                                                                 
                            
उसे क्यों बेख़याली मिले या कि बेकरारी मिले
बाद मुद्दत के भी आना न उसके सामने था
मिला ऐसे वो जैसे कि कोई दुश्मन न मिले
चलो अच्छा नहीं हूं मैं चलो बुरा ही सही
मगर वो लोग थे कैसे कभी जो हमसे मिले
नहीं नजदीक आए तुम न कोई गुफ्तगू की
क्यों फिर ऐसा लगा शोला कोई शबनम से मिले
मुझे तो ख्वाब पर भी कुछ यकीं नहीं होता
जो देखा अपने को हमने किसी हमदम से मिले
सफर पूरा कभी तो होगा फिर ये सोचूंगा
कभी कोई तो मेरे जैसा ही मुझसे न मिले
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38 minutes ago

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