आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

याद रखना

                
                                                         
                            जहां हम मिले थे पहले पहल वो सड़क का मोड़ याद रखना।
                                                                 
                            
जहां दिल खिले थे पहले पहल वो सड़क का मोड़ याद रखना।।
.
.
जिंदगी में याद आएंगे हसीन वो लम्हें जो सदाबहार थे।
भूल जाना सब कुछ मगर वो सड़क का मोड़ याद रखना।।
.
.
ना जाने कितनी लहरें आएंगी उफनती इस ज़िंदगी में।
हर लहर भूलना मगर वो सड़क का मोड़ याद रखना।।
.
.
साथ चलने की कसम जिस मोड़ पर खाई थी हमने।
छोड़ देना सब मगर वो सड़क का मोड़ याद रखना।।
.
.
मुश्कि़ल दौर होता नहीं है कभी वो जाने है निज़ाम-ए-जहां।
ग़म हो या ख़ुशी हो अनिल वो सड़क का मोड़ याद रखना।।
.
.
पंडित अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर