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रस्ता कौन बताएगा?

                
                                                         
                            सब दुश्मन बन जाएँगे तो यारी कौन निभाएगा
                                                                 
                            
मैं भूला तो मुझको आखिर रस्ता कौन बताएगा?

तुम अच्छे हो मारो मुझको पत्थर दिल पर हाथ रखो
तुम सच्चे हो तुम पर आखिर पत्थर कौन उठाएगा?

झील सरीखी नीली आँखों में हैं दोस्त कवँल सूखे
अब तो मेरा ही चहरा बस मुझको रोज डराएगा।

पीछे मुड़कर देख रहा हूँ बीते दिन के स्वप्न सभी
लेकिन डर है इन स्वप्नों से मुझको कौन जगाएगा।

धोका देने वाले अपने-गै़र अनिल सब शामिल हैं
राम ही जाने इस दुनिया में अपना कौन कहाएगा।
-पंडित अनिल
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2 घंटे पहले

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