" ऊं नमः शिवाय "
श्रीरामजी ध्याये जिनको,रावण भी ध्याये।
जगत में शिव ही सत्य कहलाए।।
कालकूट विष पान करे शिव।
चींटी कुंजर को दान करे शिव।।
हिमपृष्ठों का वासी बाबा,नीलकंठ हो जाए।
जगत में शिव ही सत्य कहलाए।।
श्मशानों की भस्म रमाए।
सर्पों की माला लटकाए।।
नंदी वाहन खड़ा दुआरे,शिव-शिव शंभो गाए।
जगत में शिव ही सत्य कहलाए।।
पूजित है परिवार सृष्टि में।
शिव समग्र हैं,हैं समष्टि में।।
देते शुभ संदेश त्याग का,जिसके मन रम जाए।
जगत में शिव ही सत्य कहलाए।।
रत्न चतुर्दश समद से निकले।
देव-दनुज सबके मन पिघले।।
कालकूट विष कंठ बिठाए,हिय में राम समाए।
शिव जी नीलकंठ कहलाए।।
जगत में शिव ही सत्य कहलाए •••••
---- पंडित अनिल
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