मैं वो बनफूल हूँ जिससे सिंगार होगा नहीं
चाहकर भी किसी को मुझसे प्यार होगा नहीं।
न कोई ख़ुश्बू न सौंदर्य दिया मालिक ने।
मेरे मिटने पर भी कोई विचार होगा नहीं।।
-पंडित अनिल
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