ज़माना है ये मज़मा देखने को दौड़ आएगा
गिरा गर तू कहीं तो तालियाँ दे मुस्कुराएगा।
क़दम अपने सँभालो अपने दीपक खुद बनो प्यारे
तुम्हें कोई नहीं भूले से रस्ता भी बताएगा।
झटक कर साथ छोड़ेंगे निकलते ही सभी मतलब
लहू भर अश्क़ आएँगे तुम्हें रब याद आएगा।
बिगड़ जाएगा अपना वक़्त अपने ही सताएँगे
न कोई काम आता है न कोई काम आएगा।
भरोसा खुद पे रख हिम्मत से हासिल है अनिल सब कुछ
पलट जाएगा तेरा वक़्त तू भी जगमगाएगा।
-पंडित अनिल
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