हिंदी—हमारी पहचान
हिंदी केवल भाषा नहीं,
भारत की मुस्कान है,
जन-जन के मन की धड़कन,
माटी की पहचान है।
तुलसी की चौपाई इसमें,
संत कबीर की वाणी है,
प्रेमचंद के शब्दों में,
है सत्य कथा कल्याणी है।
हिंदी को सम्मान मिले,
हर मन में अभिमान रहे,
विश्व-पटल पर गर्व से गूँजे—
हिंदी हिंदुस्तान रहे।
-पंडित अनिल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X