हिन्दी अब जन-जन की भाषा
पूर्ण हुई सदियों की आशा,
मिला हमें परित्राण तिमिर से
देखो, आया नया बिहान।
हिन्दी बोले हिन्दुस्तान।
हिन्दी पग पर खड़ी हुई है
अंगरेजी से बड़ी हुई है,
संसद बोले, कोर्ट - कचहरी
"जय-भारत"कह लड़े जवान।
हिन्दी बोले हिन्दुस्तान।
है प्रसार हिन्दी का जग में
मानस में, बहती रग- रग में,
उड़िया, गुजराती, मलयाली
कौन यहाँ इससे अनजान!
हिन्दी बोले हिन्दुस्तान।
देवनागरी है कल्याणी
सरस,सहज,लगती मृदु -वाणी,
विश्व-पटल पर सुन-सुन हिन्दी
बोल उठा है सकल - जहान।
हिन्दी बोले हिन्दुस्तान।
कसर नहीं अब रही शेष है
एक सूत्र में बँधा देश है,
दिग-दिगन्त हिन्दी स्वर-लहरी
बनी हिन्द की है पहचान।
हिन्दी बोले ओ हिन्दुस्तान।
हर भाषा से चलती मिल- जुल
हर बोली मृदु, कोमल, मंजुल,
कन्नड़, तेलुगु या पंजाबी
रहती सबसे एक समान।
हिन्दी बोले हिन्दुस्तान।
अंगरेजी पर लगती भारी
बनती है जब ठेठ - बिहारी,
भोजपुरी , मगही की लय में
अनपढ़ बोले और सुजान।
हिन्दी बोले हिन्दुस्तान।
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