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फिर पधारना माँ

                
                                                         
                            माँ, तेरे चरणों में रख दी,मन की सारी बात,
                                                                 
                            
सूनी-सूनी लगती मैया, तेरे बिन हर रात।
नयनों में सावन ठहरा है,अधरों पर मुस्कान,
विदा करूँ कैसे माँ तुझको,तू ही मेरी जान॥

माँ, तेरी विदाई में भी, इक मीठा-सा प्यार रहे,
नयनों में बरखा छाए, अधरों पे जयकार रहे।
आबार एशो माँ, फिर से अपना दरबार सजे,
तेरी कृपा से मैया, हर आँगन गुलज़ार रहे।

जा ताड़ू माई, मनवा मोरा, रोवे बारंबार,
तोहरे बिना सूना लागे, अँगना अउर दुआर।
फेरू अइहऽ माई अगिला बरिस, लेके नेह-दुलार,
तोहरे चरन में बसल बा, हमार ई संसार।

बिदाई की बेला आई, भींजे चुनरी लाल,
शोबाई बोले-आबार एशो माँ, करती सदा निहाल।
जय माता दी गूँज उठे है ,गूँजे ढोल-मृदंग,
माँ, तू दिल में रहना हरदम,छूटे कभी न संग।

—पंडित अनिल 
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एक घंटा पहले

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