सवाल मुझ पे उठाया तो दोस्त रो बैठा
गले से उनको लगाया तो दोस्त रो बैठा।
अजीब शह्र के हैं लोग गुम सभी खुद में
किसी को पास न पाया तो दोस्त रो बैठा।
पता किसी को नहीं जो भी मुझ पे ग़ुजरी है
उसे जो हाल बताया तो दोस्त रो बैठा।
तमाम उम्र लगा दी जिसे बनाने में
वो घर मैं छोड़ के आया तो दोस्त रो बैठा।
न जाने कैसी है किस्मत अनिल कि अपनों ने
मुझे शिकार बनाया तो दोस्त रो बैठा।
-पंडित अनिल
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