जो भी मिलता है मुझे हाथ मिलाने वाला
वो भी होता नहीं है हाथ बढ़ाने वाला।
सबकी लिपटी हुई हैं बातें शहद में लेकिन
सबकी नज़रों में दिखा रंग ज़माने वाला।
हर किसी को जो अनिल अपना समझ लेते हो
बस वही होता है ऐ!दोस्त गिराने वाला।
बाद में अश्क़ की सौगात ही देगा वो जो
ख़्वाब ही ख़्वाब है आँखों को दिखाने वाला।
घर से निकला है ज़िगर चाक लिए देख अनिल
अब वो लगता है,नहीं लौट के आने वाला।
-पंडित अनिल
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