*बाँध मुसाफ़िर गठरी*
कब आ जाए गाड़ी,कुछ नहीं ठिकाना है।
बाँध मुसाफ़िर गठरी,टीसन से जाना है।।
मन में नजाने कितने, चोरों ने डाला डेरा।
इसिलिए अब तक कट पाया नहीं,जनम का फेरा।।
मन मंदिर की जोत जला ले, वही ख़ज़ाना है।
बाँध मुसाफ़िर गठरी,टीसन से जाना है।।
चादरिया में दाग लगा मत,कर ले भजन हरी का।
कब फूटेगी पता नहीं है, इस कच्ची गगरी का।।
गुरु की शरण ले अनिल,उन्होंने सच पहचाना है।
बाँध मुसाफ़िर गठरी,टीसन से जाना है।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X