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अच्छा किए बग़ैर

                
                                                         
                            अच्छा न कुछ भी होता है अच्छा किए बग़ैर
                                                                 
                            
इस ज़िंदगी को देखिए सौदा किए बग़ैर।

ख़ुशियाँ किसी दुकान में बिकती नहीं यहाँ
ख़ुश रहना है यहाँ कोई वादा किए बगै़र।

बेकार में न रोइए के वक़्त है नहीं
मिलिए हरिक से दोस्त बहाना किए बग़ैर।

गर चाहिए सुक़ून तो मतलब न ढूँढ़िए
हँसिए ज़िगर से खुल के तमाशा किए बग़ैर।

ज़न्नत या स्वर्ग सब है ज़मी पर अनिल यहीं
लेकिन मिलेगा कुछ नहीं तौबा किए बग़ैर।

 
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2 महीने पहले

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