आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बारिश की रात सुहानी

                
                                                         
                            बरसाती है याद पुरानी
                                                                 
                            
ये बारिश की रात सुहानी।

कभी तेज बौछारें बनकर
गोरी मस्त फुहारें बनकर,
बारिश की ये बूंदें आतीं
झिलमिल तारों में से छन कर।

जाने किसके इंतजार में
जागा करती प्रेम दीवानी।

ये बारिश की रात सुहानी।

झूम झूम कर बादल आते
फिर रिमझिम के गीत सुनाते,
लोक नृत्य करती बीजुरिया
नभ में मेघ मृदंग बजाते।

चांद चांदनी की लिखती है
भीगी भीगी प्रेम कहानी।

ये बारिश की रात सुहानी।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर